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त्र्यंबकेश्वर में काल सर्प दोष: प्रकार, प्रभाव, लक्षण, उपाय और पूजा निवारण
वैदिक ज्योतिष की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, जब जन्म कुंडली में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि जैसे सात पारंपरिक ग्रह राहु और केतु द्वारा निर्मित अक्ष के बीच स्थित होते हैं, तो इसे काल सर्प दोष या काल सर्प योग कहा जाता है। कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में इस ग्रह स्थिति को जीवन…

